21 July 2012

यह हमारी नजरोका नूरे-दिदार बिगड़े है ,चातक


यह     हमारी   नजरोका    नूरे-दिदार   बिगड़े    है ,
वो     खुद   अपनेसे ,  बेगाने   हाल   कर   बठे   है ,


यह   कया  माजरा   है , मतलब  से   यार  होते  है ,
यह  नथी  हमें  भी  खबरे ,दिलोमे चिराग  होते  है


यह     हमारी    नजरोका   नूरे-दिदार    बिगड़े   है ,
वो      खुद  अपनेसे ,  बेगाने    हाल  कर  बठे    है ,


क्या    बुजाये  अब  हम , खुद  जलके  रह  गए  है             .
यह  इश्के -मोहबत् में ,क्यों काले दाघ  कर बेठे  है


यह    हमारी   नजरोका    नूरे-दिदार     बिगड़े   है ,
वो   खुद  अपनेसे ,  बेगाने    हाल   कर    बठे    है ,


यह क्या कजाए -उल्फत है  हुश्ने से प्यार होता  है
यह  नथी  हमें  भी  खबरे , फूलो में  खार  होते   है


यह    हमारी   नजरोका    नूरे- दिदार   बिगड़े    है ,
वो   खुद    अपने से ,  बेगाने   हाल   कर   बठे   है ,.

चातक    


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5 comments:

  1. priya jain liked chatak Dev.'s blog post यह हमारी नजरका नूरे-दिदार बिगड़े है ,चातक.
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  2. VITHTHALDAS JAMNADAS PARIKH liked chatak Dev.'s blog post यह हमारी नजरका नूरे-दिदार बिगड़े है ,चातक.
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  3. Deepa Sevak liked chatak Dev.'s blog post यह हमारी नजरका नूरे-दिदार बिगड़े है ,चातक.
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  4. Dipti p patel liked chatak Dev.'s blog post यह हमारी नजरका नूरे-दिदार बिगड़े है ,चातक.
    15 hours ago

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