9 July 2013

माना शैाके -सफ़र हो तुम ,रहगुजर मेरे साथ नहीं, चातक


माना  शैाके -सफ़र हो  तुम ,रहगुजर  मेरे साथ  नहीं ,
रस्मे -दुनिया   की तोड़  दे ,इन्कलाब मेरे साथ  नहीं .


यह    दस्तूरे -जमाने   में  तेरे  चाहनेसे   क्या  होगा , 
जबसे  सनम   दस्ते -दुआ  जहाँका  मेरे  साथ   नहीं .        


मैने    सनम     माना,   तुम    इश्का     आईना   हो ,
जबसे    शम्माऐ -इश्कके   उजाले   मेरे  साथ   नहीं .


मेरे   साथ   सनम,  ताऊम  चलनेका   क्या  फायदा ,   
जबसे       रह्गुजरे -जिन्दगी      मेरे    साथ     नहीं .               


राहे -सफ़र जिन्दंगी में  कौन किसके साथ चलता है ,
 जब   सनम   खुद    की    रूह    मेरे    साथ     नहीं .


किस  तरह  यह   गमको   "चातक"  निकाला  जाये ,
आज     साकी   ,  सागरे -मय     मेरे    साथ    नहीं .

चातक

१ शैाके -सफ़र -यात्रा की उमंग
 २ इन्कलाब -क्रांति
 ३ दस्ते -दुआ -दुआ का हाथ
 ४ ताऊम -उम्रभर
 ५ रह्गुजर-राह



 

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