4 December 2019

हादसा इक हुआ है मेरी बन्दगीके साथ ,मुकुल दवे 'चातक '

हादसा    इक    हुआ   है   मेरी   बन्दगीके   साथ
जिन्दगीमे सब कुछ लूटा दिया दिल्लगी के साथ

में  क्यों  किसीके  गिले  शिकवे  करूँ  हर   कदम
इन्साफमे     मजबूरियाँ    है     आदमीके    साथ

हो   गया  महसूस   किसीने   उछाला  है  सिक्का
मुझे  मिला  है यह  सदा  वो  मुफ़लिसी  के  साथ  

दूरियाँ   मेरे  दरमियाँ   उसकी  है  यहभी  सच  है
हमसफ़र   हरकदम   रहा  मेरी  बेबसी  के   साथ

हाल  सुनाता  है  हमारा  रो -रो  कर  दुनियासे वो
राजदारी  कैसी  है  यह  मेरी  शर्मिन्दगी के  साथ

मुकुल दवे 'चातक '

No comments:

Post a Comment